मुंबई में सामान्य वर्ग की महिला होगी मेयर, शिवसेना यूबीटी ने किया कड़ा विरोध

 

मुंबई। देश की सबसे अमीर नगर पालिका मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के नए मुखिया को लेकर स्थिति साफ हो गई है। राज्य के नगर विकास विभाग ने महाराष्ट्र की 29 महानगर पालिकाओं के लिए आरक्षण की घोषणा कर दी है, जिसमें मुंबई मेयर पद को 'सामान्य महिला' वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है, इस फैसले के बाद अब मुंबई के 'प्रथम नागरिक' की कुर्सी पर किसी महिला पार्षद का बैठना तय है।

यह आरक्षण लॉटरी के जरिए तय किया गया, जो मुंबई के मंत्रालय में नगर विकास राज्यमंत्री माधुरी मिसाल की अध्यक्षता में आयोजित की गई थी, आरक्षण की इस घोषणा के साथ ही राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी तेज हो गई है, 15 जनवरी 2026 को हुए चुनावों के बाद महायुति गठबंधन (भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना) के पास बहुमत है, भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि शिंदे गुट ने 29 सीटें जीती हैं।

शिवसेना (यूबीटी) ने जताया कड़ा विरोध

इस आरक्षण प्रक्रिया पर विपक्षी दल शिवसेना (यूबीटी) ने कड़ा ऐतराज जताया है। पूर्व महापौर पेडणेकर ने आरोप लगाया कि सरकार ने आरक्षण के नियमों में फेरबदल किया है। उद्धव ठाकरे गुट का मानना था कि इस बार मेयर पद अनुसूचित जनजाति (एसटी) या अन्य पिछगा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षित होना चाहिए था। विपक्ष ने इस पूरी प्रक्रिया को 'फिक्स्ड' बताते हुए इसका विरोध किया है।

शिवसेना (यूबीटी) ने क्यों जताई आपत्ति

शिवसेना (यूबीटी) द्वारा उठाई जा रही आपत्ति के पीछे मूल कारण यह है कि भाजपा एवं उसकी सहयोगी शिवसेना (शिंदे) से चुनकर आए कुल 118 पार्षदों में से कोई भी अनुसूचित जनजाति से नहीं है। जबकि शिवसेना (यूबीटी) से चुनकर आए 65 पार्षदों में से दो महिलाएं इसी वर्ग से चुनकर आई हैं 

ऐसी स्थिति में यदि लॉटरी में मुंबई का महापौर पद अनुसूचित जनजाति के हिस्से में जाता, तो सदन में भाजपानीत गठबंधन का बहुमत होने के बावजूद उसे मेयर पद शिवसेना (यूबीटी) को देना पड़ता।

ऐसा न हो पाने से महापौर पद को लेकर उद्धव ठाकरे की रही-सही उम्मीदें भी जाती रही हैं, इसलिए उनकी पार्टी की गट नेता किशोरी पेडणेकर की ओर से लॉटरी प्रक्रिया पर ही सवाल उठाए जा रहे हैं।

कल्याण-डोंबीवली में भी भाजपा के पास नहीं है एसटी पार्षद

मुंबई के अलावा कल्याण-डोंबीवली महानगरपालिका (कडोमपा) में भी भाजपा और शिवसेना (शिंदे) के बीच महापौर पद को लेकर खींचतान चल रही है, लेकिन मुंबई की भांति ही कडोमपा में भी भाजपा कोई अनुसूचित जनजाति का पार्षद नहीं है, इसलिए वह कडोमपा में महापौर पद की दौड़ से अपने आप बाहर हो गई है।

कडोमपा में शिवसेना (शिंदे) और भाजपा गठबंधन करके चुनाव लड़े थे, यहां शिंदे गुट को 53 और भाजपा को 50 सीटें मिली हैं। कडोमपा के सदन में बहुमत हासिल करने के लिए 62 पार्षदों की जरूरत होती है। शिवसेना को राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के पांच पार्षदों ने अपना समर्थन देने की घोषणा कर दी है, और शिवसेना (यूबीटी) के भी चार पार्षद उसके साथ आ सकते हैं।

इस प्रकार भाजपा के सहयोग के बिना भी कल्याण-डोंबीवली में बहुमत का आंकड़ छू सकती है, ऐसी स्थिति में भाजपा को विपक्ष में बैठने का रास्ता चुनना पड़ सकता है।


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